किसी ने द्वार खटखटाया
मैं लपककर आया,
जैसे ही दरवाजा खोला
तो सामने बुढ़ापा खड़ा था,
भीतर आने के लिए
जिद पर अड़ा था..
मैंने कहा -
"नहीं भाई!
अभी नहीं
अभी तो यह घर मेरा है..''
वह हँसा और
बोला-
...
"यह घर न तेरा है न मेरा है
चिड़िया रैन बसेरा है.."
मैंने कहा -
".. अभी तो कुछ दिन रहने दे,
अभी तक
अपने ही लिए जिया हूँ ..
अब अकल आई है
तो कुछ दिन
दूसरों के लिए भी जीने दे..''
बुढ़ापा बोला -
"अगर ऐसी बात है
तो चिंता मत कर..
उम्र भले ही तेरी बढ़ेगी
मगर बुढ़ापा नहीं आएगा,
तू जब तक दूसरों के लिए जिएगा
खुद को जवान ही पाएगा..''
*बढ़ती उम्र का लुत्फ़ उठाइये*
🙏सादर प्रणाम🙏
बुढापा
Reviewed by S. SINGH
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November 17, 2019
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